
वॉयस आफ इंडिया मालदीव में डूब चुकी है। हमारा होनहार इस्मीत अब नहीं रहा। गायन की उसकी अलग शैली की प्रशंसा तो स्वर सम्राग्यी लता मंगेशकर भी कर चुकी हैं। लुधियाना के इस सपूत के निधन पर अब सब जगह शोक है। उसका जन्म २ सितंबर १९८९ को पंजाब के लुधियाना शहर में हुआ। नवंबर २००७ में वह स्टार वॉयस आफ इंडिया का विजेता रहा। वह मुंबई के एमएनसी कालेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र था। देश ही नहीं विदेश में भी उसके चाहने वाले थे।इस्मीत को श्रद्धांजलि देते हुए सरदार अंजुम ने कुछ पंक्तियां कही हैं-
इस्मीत सबका मीत बना और खो गया।
कुछ तो बता दे आस्मां ये कैसे हो गया।
(यह पूरी कविता दैनिक हिंदुस्तान में देखी जा सकती है।)
साथ ही संजीव द्वारा बनाया गया स्कैच। बस ऐसी यादें अब शेष हैं इस्मीत तुम्हारी।
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